आगरा। कासगंज की तिरंगा यात्रा के बाद आज मोहब्बत की नगरी आगरा में मुस्लिम उलेमाओं के नेतृत्व में एक तिरंगा यात्रा निकालने का ऐलान किया गया था जिसको लेकर बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शहीद स्मारक पर एकत्रित हुए। यात्रा के ऐलान के बाद भारी संख्या में पुलिस बल शहीद स्मारक पर तैनात कर दिया गया।
कासगंज में हुई घटना के बाद जिस तरह से सांप्रदायिक सौहार्द खराब हुआ और मजहब के नाम पर राजनीति भी शुरू हो गई। वहीं आगरा में मोहब्बत का पैगाम देते हुए मुस्लिम समाज ने खुद को देशभक्त साबित करने और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए शहीद पार्क से तिरंगा यात्रा निकालने का आयोजन किया।
सैकड़ों की संख्या में पहुंचे मुस्लिमों को पहले से ही पुलिस ने घेर रखा था। आगरा में पहले से ही धारा 144 लगी हुई थी लेकिन इस यात्रा की अनुमति नहीं मिलने के बाद भी मुस्लिमों का इकट्ठा होना पुलिस-प्रशासन के हाथ-पाँव फुला रहा था। वहीं मुस्लिम समाज महिलाओं के साथ एकत्रित होकर तिरंगा यात्रा निकालने पर आमादा थे।
इस यात्रा के माध्यम से पूरे देश में मुस्लिम अपने को देशभक्त का मैसेज देना चाहता है। इस यात्रा में बच्चे महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल रहे। संरचना संस्था की अध्यक्षा शबाना खंडेलवाल का कहना था कि हिंदुस्तान की मजहब किसी विशेष के लिए नहीं है। ये हर हिदुस्तानी का देश है। ये कहते हुए वो कैमरे के सामने ही रो पड़ीं।
तिरंगा यात्रा का नेतृत्व कर रहे मुफ्ती और मौलानाओं का कहना था कि कासगंज की घटना हिंदुस्तानियों के लिए एक निंदनीय घटना है। किसी भी हाल में इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुसलमानों देश के आजाद होने में जितना साथ दिया और कुर्बानियां दी वह आज तक जारी है। मौलानाओं ने प्रदेश सरकार से कासगंज में हुई घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की है।
धारा 144 लागू होने से शहीद स्मारक पर पहले ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। पुलिस-प्रशासन ने पहले का तरीका अपनाते हुए मुस्लिम समाज के नेताओं को समझा बुझाकर वहीं पर ज्ञापन लिया और तिरंगा यात्रा को शहीद स्मारक में ही शांति पूर्वक खत्म करा दिया।
