आगरा। ट्रेन दुर्घटनाओं के दौरान अक्सर यह देखा जाता था कि ट्रेन के डिब्बे एक दूसरे डिब्बे के ऊपर चढ़ जाया करते थे जिससे हादसा और ज्यादा गंभीर हो जाया करता था लेकिन रेलवे ट्रैन हादसों में कमी के लाने के साथ साथ हादसे के दौरान ट्रैन के डिब्बे दूसरे डिब्बे पर न चढ़े इसके लिए रेलवे विभाग अत्यधुनिक तकनीक का इस्तमाल कर रेल डिब्बे की नई रेक में विशेष कम्पलिंग का प्रयोग कर रहा है। यह नई तकनीक आगरा कैंट स्टेशन पर खड़ी ट्रैन बोगी की नई रेक में भी प्रयोग की गई है। अत्यधुनिक तकनीकों से लैस इस रेक को आगरा कैंट से अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन में प्रयोग किया जाएगा। रेलवे ट्रैक पर दौड़ने को तैयार इस रेक को हरी झंडी का इंतजार है जो संभवतः 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर मिल सकती है।
रेलवे अधिकारी राजेन्द्र कुमार ने बताया कि इस पूरी रेक में करीब 40 डिब्बे है जो अत्यधुनिक तकनीक से लैस है। सभी बोगियों में बायो टॉयलेट है। जनरल कोच भी स्लीपर कोच की तरह ही सुविधाओ से लैस है। इसमें दीनदयालु कोच भी लगे है।
रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि अब नई तकनीक से बनने वाले कोच अगर ट्रेनों में लगाए जाएंगे तो दुर्घटनाओं में तो कमी आएगी वही रेल यात्रियों को भी अत्याधुनिक सुविधाएं मिल पाएंगी।
