हरियाणा के रोहतक निवासी भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य डा. दिनेश घिलौड़ के बेटे अनुवाक चतुर्थ साल के छात्र हैं और वहां से एमबीबीएस कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में तैनात मां सुदेश चौधरी भावुक हो गईं और आंसू तक बेटे को देखकर छलक पड़े। अनुवाक ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि 10 फरवरी को ही भारतीय दूतावास की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई थी। मगर भारतीय छात्रों को वहां के विश्वविद्यालय प्रबंधनों ने दो टूक जवाब दे दिया कि सौ फीसद अटेंडेंस होनी चाहिए। यदि जाना चाहते तो अपने रिस्क पर जाएं। अब नौ मार्च तक अवकाश हैं। छात्र ने बताया कि जिस शहर में हम रह रहे हैं वहां तीन दिन पहले रूसी सेना पहुंची थी और अब वहां ब्रिज भी उड़ा दिया है। बार्डर पार करने के बाद ही चैन की सांस ली, जब यूक्रेन के अंदर थे तो मेंटल स्ट्रेस इतना था कि शब्दों में बयां नहीं कर सकते है। वहीं, यूक्रेन के लोग भी खूब मदद कर रहे हैं।
अनुवाक ने बताया कि हमारे शहर से राजधानी कीव 700-800 किमी दूर है। जबकि हंगरी के बार्डर 1000-1200 किमी दूर है। ट्रेन के लवीव शह में आए। 300 किमी का सफर बस से चौक बार्डर से हंगरी में एंट्री की। 18 घंटे के सफर के दौरान ट्रेन राजधानी कीव से भी गुजरी। परिजन चिंता न करें, इसलिए अनुवाक ने बताया नहीं। लेकिन मां सुदेश व पिता दिनेश ने लोकेशन आन कराई तो दो रात उनके घरवालों की नींद मुश्किल से कटी।
यूक्रेन से लौट छाल अनुवाक ने बताया कि भारतीय तिरंगा आज हमारे लिए गौरव बन गया है। भारतीय छात्रों की छोड़िए टर्की और पाकिस्तानी छात्रों के दल तक वहां से निकलने के लिए भारतीय तिरंगे का सहारा लेकर बार्डर पार कर रहे हैं। कुछ दूसरे देशों के छात्रों से रास्ते में मुलाकात हुई तो उन्होंने यही कहा कि हमें तिरंगे के साए में निकलना अधिक सुरक्षित लग रहा है। रोहतक के वन सिटी निवासी अनुवाक अपने घर लौटे तो उन्होंने जपोजिया शहर से निकलने से लेकर देश तक लौटने की पूरी स्थिति से अवगत कराया।
अनुवाक ने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का आभार जताया और यह भी कहा कि हमें गर्व है कि हमारी तिरंगे की पहचान इतनी मजबूत है। यह भी कहा कि ट्रेन से लेकर बस तक का किराया, भोजन से लेकर पानी तक का खर्चा सरकार ने किया।
