मथुरा का रहने वाला एक छात्र यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच फंसा हुआ है। उसकी वतन वापसी का रास्ता भी तक साफ नहीं हो सका है। सोमवार को कई छात्रों ने आने की कोशिश की थी, लेकिन पास में हुए एक बम धमाके से उनके हौसले टूट गए और वह दोबारा बंकर में जा कर छुपे हैं। मनीष के परिजनों ने विदेश मंत्रालय में बात की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
मथुरा जिले के सौंख कस्बा के पुन्नाथोक निवासी अशोक का बेटा मनीष यूक्रेन के सूमी स्टेट यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष छात्र है। युद्ध के दौरान विकट परिस्थितियों का सामना मनीष ने किया। 24 फरवरी से रूस के हमले के बाद से मनीष हास्टल के बंकर में छिपे हैं। वीडियोकाल के जरिए बार-बार परिजन बात कर रहे हैं, लेकिन वतन वापसी के लिए कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा। पिता अशोक कुमार बेटे की वापसी के लिए दिल्ली में विदेश मंत्रालय तक चक्कर लगाकर आ गए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। सोमवार सुबह मनीष ने अपने साथियों के साथ पौलेंड बार्डर के लिए बस बुक की। यूनिवर्सिटी से निकलकर सभी छात्र बस में बैठने ही जा रहे थे, तभी कुछ किमी के दायरे में बम ब्लास्ट हुआ। धमाका इतनी तेज था कि आसपास की इमारतें तक हिल गईं। सभी छात्र दहशत में आ गए और दौड़कर फिर बंकर में छिप गए।
फोन पर मनीष ने बताया कि बम ब्लास्ट से वह और उसके साथी दहशत में आ गए हैं। फिलहाल कोई भी बंकर से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। रास्ते में भी बस पर हमला हो सकता है, ऐसे में कोई भी फिलहाल नहीं जा रहा है। इधर, पिता ने फिर बेटे की वतन वापसी के लिए विदेश मंत्रालय में संपर्क किया, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया।
