आगरा। इतिहास के गर्त में धुधले पड़े भारत के बंटवारे का दर्द आज भी दिलों में जिंदा है। जिन्होंने बंटवारे के दंश को सहा, उनकी कहानी देख हर दिल क्रोध से भरकर रो उठा। मां के सामने लुटती बेटियों की अस्मत, जवान बेटे की लाश पर बिलखता मजबूर बाप। स्वाभिमान की खातिर किसी ने जिन्दा बेटियों को कुओं में धकेल दिया तो किसी ने तलवार से खुद ही बेटी के सिर को धड़ से अलग कर दिया। अपनी जन्म और कर्म भूमि से खाली हाथ भगा दिए गए तो कुछ खुद चले आए। ये कहानी फिर न दोहरायी जाए, इसलिए उस पीढ़ी के दर्द को आज की युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का काम आरए मूवीज की डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म बंटवारे का दर्द करेगी।
कुछ ऐसी ही अनुभूतियों को समेटे था आरए मूवीज की फिल्म बंटवारे का दर्द फिल्म का प्रीमियर शो। जिसका शुभारम्भ मुख्य अतिथि केन्द्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल व कैबिनेट मंत्री (उप्र) योगेन्द्र उपाध्याय ने स्विच ऑन कर किया।
संजय प्लेस स्थित अवध बैंकट हॉल में आयोजित फिल्म के प्रीमियर शो में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा सिंधी पंजाबी सिख हमारे साझा पुरखे हैं जो बंटवारे की समय जमीदार उद्योगपति अपना सब कुछ गवा कर आए थे वह दोबारा अपनी मेहनत से फिर सफल हो गए। युवा पीढ़ी को सही इतिहास अवगत कराने का दर्द का बटवारा फिल्म सही माध्यम है।
मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि अतीत की राजनीतिक भूल को याद दिलाता है खाक पति से करोड़पति सिख पंजाबी सिंधी अपने पुरुषार्थ से बने हैं यह दर्द का बटवारा फिल्म ने याद दिलाया है। फिल्म निर्माता रंजीत सामा व विजय सामा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्व.श्रीराजकुमार सामा, स्व. लालचंद डाबर, स्व. कंवल नारायण खन्ना, स्व. ललिता अरोरा जी की प्रेरणा से बनी 65 मिनिट की फिल्म का उद्देश्य बंटवारे के दौरान जो दर्द झेला उससे आज की चौथी पीढ़ी को अवगत कराना है। आज की पीढ़ी को पता ही नहीं कि हमारे बाप-दादा ने बंटवारे के दौरान क्या-क्या मुसीबतें झेलीं। जिंदा बेटियों को किसी ने काट दिया तो किसी ने कुएं में डाल दिया। हर दर्शक ने फिल्म की सराहना की। बंटवारे के दौरान भारत आए लोगों को स्व. राजकुमार सामा ने विस्थापित करने में बहुत मदद की। जूते व कपड़े के कारोबार करने में सहयोग किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रमोद महाजन, गोवर्धन सोनेजा, घनश्याम, हरीश, सुधीर महाजन, दिवाकर महाजन, अनिल अरोड़ा, संजू अरोड़ा, सोनू सचदेवा, रीनू गुप्ता, जय कुमार, बिजन मंडल, रवि महाजन,राकेश महाजन, कुसुम महाजन राकेश अरोड़ा राजेश, संजय, प्रदीप मेहरा, धर्मपाल, भीष्म, मुरलीधर,आदि उपस्थित थे।
बंटवारे का दर्द झेलने वालों ने बयां किए अपने अनुभव
कार्यक्रम में बंटवारे के दौरान पाकिस्तान बन चुके भारत के ही हिस्से से खाली हाथ लौटे और आज शहर के प्रतिष्ठित लोगों में शुमार पूरन डावर, रोचीराम नागनानी, अमरदेव साहनी, भीमसेन अरोरा, नारायण दास लालवानी, जयराम होतचंदानी, सरदार मंजीत सिंह, रानी सिंह, सुभाष मल्होत्रा, अनिल अरोड़ा, डॉ. रवि सभरवाल, राजेन्द्र शर्मा, राजकुमार भसीन, तिलकराज महाजन, हेमन्त भोजवानी, चंद्र सोनी, सुभाष मल्होत्रा, किशोर खन्ना ने अपनी अनुभवों को साझा भी किया। बताया कि अपने बसे बसाए घर और व्यापार को छोड़ खाली हाथ लुटे पिटे भारतीय पाकिस्तान से भारत लौटे तो दर्द के सिवाय कुछ नहीं था। खाली हाथ और सिर्फ दर्द लेकर लौटे भारतीयों ने भले ही आज बेहतर मुकाम पा लिया हो लेकिन जख्म आज भी हरा है। फिल्म के सह निर्माता अजय शर्मा, ब्रजेश शर्मा, लेखक व निर्देशक राष्ट्रपति पदक विजेता हेमन्त वर्मा हैं। संगीत रामशंकर जजवारे, गीत लिखे हैं संजय दुबे व पार्श्व गायिका सुजाता शर्मा हैं।
