इजरायली दूतावास के पास 29 जनवरी को हुआ बम धमाका बड़ी साजिश का लिंक हो सकता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस धमाके के तार सन 2012 में हुए इजरायली डिप्लोमेट्स से जुड़े हुए हैं। यह आशंका किसी और ने नहीं बल्कि भारत में इजरायल के राजदूत जॉन मलका ने जताई है। उन्होंने कहा कि “साल 2012 में, दिल्ली में इजरायली डिप्लोमेट्स पर एक आतंकी हमला हुआ था जो कि दूतावास से ज्यादा दूर नहीं था। हो सकता है ये जुड़े हों, कोई पैटर्न हो। हम इसकी जांच कर रहे हैं और यह विकल्पों में से एक है।” साथ ही इस पर एक शब्द जताया कि यह हमला आतंकी हमला हो सकता है।
इस तरह का हमला 13 फरवरी सन 2012 में भी हुआ था जिसमें भारत में तैनात एक इजरायली डिप्लोमेट की कार को निशाना बनाया गया था। उस समय काल में डिप्लोमेट की पत्नी ताल येहोशुआ कोरेन मौजूद थीं जो अपने बच्चों को स्कूल से लेने जा रही थीं। लेकिन कार में पीछे से आए मोटरसाइकिल सवार ने मैग्नेटिक एक्सप्लोजिव डिवाइस जिसे स्टिकी बम भी कहा जाता है, उसे कार में लगा दिया था। जैसे ही कार औरंगजेब रोड की ट्रैफिक लाइट पर रुकी तो अचानक उससे आग की लपटें निकलने लगीं। गनीमत रही कि कोरेन बाल-बाल बच गई थीं।
2012 में जिस औरंगजेब रोड पर कार में बम प्लांट किया गया था वहीं शुक्रवार को उसी रोड पर स्थित इजराइली दूतावास के पास मामूली IED ब्लास्ट किया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि IED में शाम पांच बजकर पांच मिनट पर विस्फोट हुआ था। गनीमत ये रही कि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
फिलहाल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अलावा नैशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी भी इस धमाके की तफ्तीश कर रही है। नैशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की एक टीम को भी ब्लास्ट में यूज विस्फोटकों की जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है।
सन 2012 में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर हमले कराने का आरोप लगाया था। हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। जब दूतावास के बाहर शुकवार को धमाका हुआ तो इसके पीछे भी ईरान की ही चाल बताई गई। फिलहाल खुफिया एजेंसी मोसाद को ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और कुद्स फोर्स पर शक है।
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