आगरा रेल मंडल आगरा कैंट स्टेशन पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के तमाम वायदे करें लेकिन यह वायदे तब खोखले साबित हो जाते हैं जब कोई ऐसी घटना घटित होती है जो हर किसी को झकझोर कर रख देती है। ऐसा ही कुछ शुक्रवार को भी आगरा कैंट स्टेशन पर देखने को मिला।
पंजाब मेल से आगरा आई एक दिव्यांग महिला को ट्रैन में प्रसव पीड़ा हुई। जैसे तैसे महिला ट्रेन से बाहर उतरी और प्लेटफार्म पर ही लेट गई। प्रसव पीड़ा के कारण महिला तड़पती रही लेकिन कैंट पर तैनात रेलवे स्टाफ ने किसी भी तरह की सुध नहीं ली। फिर एक पत्रकार के पहुंचने पर पूरे मामले को कैमरे में कैद किया गया तो रेलवे प्रशासन भी हरकत में आया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला ने एक बच्चे को जन्म दे दिया। बच्चे को जन्म देने के बावजूद भी जच्चा और बच्चा काफी देर तक रेलवे के चिकित्सक आगरा कैंट स्टेशन नहीं पहुंच पाए। जबकि आगरा कैंट स्टेशन से आगरा रेलवे अस्पताल की दूरी मात्र 5 मिनट की है। यह 5 मिनट की दूरी तय करने में यहां के चिकित्सकों को घंटों लग जाते हैं।

मीडिया के स्टेशन पर पहुंच जाने के बाद काफी देर बाद रेलवे के चिकित्सक आगरा कैंट स्टेशन पहुंचे जहां से इस दिव्यांग महिला को रेलवे अस्पताल ले जाया गया और उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। बताया जाता है कि महिला मथुरा के भीम नगर की रहने वाली है जो किसी कार्य से आगरा आई थी तभी उसे प्रसव पीड़ा हुई और वो कैंट स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 2 पर लेट गई। उसने बिना किसी चिकित्सक के मदद के ही बच्चे को जन्म दे दिया। आगरा कैंट स्टेशन पर यह कोई पहली घटना नहीं है जब चिकित्सक देर से पहुंचे हो। इससे पहले भी आगरा कैंट स्टेशन पर प्राथमिक उपचार ना मिलने के कारण एक रेल यात्री की मौत हो चुकी है।
लगता है कि रेलवे प्रशासन शायद रेलवे चिकित्सकों की कठपुतली बना हुआ है। इसीलिए तो प्राथमिक उपचार देने में उसे घंटों लग जाते हैं और कई बार लापरवाही सामने आने के बावजूद रेलवे प्रशासन इन चिकित्सकों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करता है।
