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जेलबंदी की तरह रखकर कारखानों में इन नाबालिगों से करवाया जा रहा है काम

by pawan sharma

आगरा। मालिक हमसे बेहिसाब घंटे काम कराते है, खाना भी नही देते, काम के बदले मेहनत का पैसा भी नही मिल रहा है, विरोध करो तो पिटाई की जाती है। यह पीड़ा उन दो नाबालिग बच्चों की है जो सुबह आगरा कैंट स्टेशन के आउटर पर चाइल्ड लाइन संस्था को मिले। चाइल्ड लाइन संस्था इन बच्चों को चाइल्ड हेल्प डेस्क पर लेकर आये और फिर आरपीएफ इंस्पेक्टर ने इनसे वार्ता की। जो पीड़ा इन बच्चों ने बताई उसे सुनकर सभी के दिल बैठ गए और कहने लगे कि देश मे कड़े कानून के बाद भी आज बालश्रम की यह परंपरा जारी है।

आगरा कैंट के आउटर पर मिले दोनो नाबालिग बच्चे शेखपुर बलिया ज़िला कटिहार (बिहार) के रहने वाले है। दोनों के पड़ोस में रहने वाले युवक का दिल्ली में गिलट की पायल व कान के झुमके बनाने का कारखाना है। कारखानों के मालिक जो उन्हें उनके परिजनों को एक हज़ार रुपये एडवांस देकर अपने साथ इस बच्चों को लेकर आये और प्रतिमाह 5000 रुपये देने का वायदा किया लेकिन उन्हें पैसे नही दिये जाते है बल्कि जुर्म की इंतहा कर दी है। वो कारखानो में गिलट की पायल व कान के झुमके बनाने का कार्य किया करते थे।

नाबालिगों के अनुसार कारखानों के मालिक उन्हें सुबह 10 बजे से रात 2 बजे तक कार्य कराता है। उनके साथ मारपीट की जाती है। उन्हें खाना भी समय से नही देते थे। बच्चों ने बताया कि उनके मालिको द्वारा उन्हें घर मे बन्द रख काम कराते है और रविवार को केवल बाहर जाने दिया जाता और उसी दिन उनके परिजनों से बात करायी जाती थी।

आज सुबह तड़के दोनों बालक मौका पाकर भाग आये और छतीसगढ़ एक्सप्रेस के माध्यम से आगरा आ गये। रेलवे चाइल्ड लाइन ने बालकों की जीडी थाना जीआरपी आगरा कैंट से करायी है। मेडिकल के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जायेगा। बाल कल्याण समिति के माध्यम से श्रम विभाग को भी अवगत कराया जाएगा कि वह इस मामले को बाल श्रम में मुकदमा पंजीकृत करे और एएचटीयू आगरा के माध्यम से इस मामले की जांच की मांग की जाएगी। रेलवे चाइल्ड लाइन सदस्य द्वारा बालको के परिजनों से सम्पर्क किया जा रहा है।

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