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होली के दहकते अंगारे और आग की लपटों के बीच से गुजरा मोनू पंडा, चारों ओर लगे भक्त प्रह्लाद के नारे

by admin
Monu Panda passed through the burning embers of Holi and the flames, the slogans of devotee Prahlada all around

Mathura. फालैन गांव में उस समय लोग आश्चर्यचकित रह गए जब दहकती हुई होली के अंगारों के ऊपर से मोनू पंडा गुजरा। इसे देख हर कोई दंग था और चारों ओर चर्चा होने लगी कि आखिरकार मोनू इस प्रथा को कैसे निभा लेता है। होली के अंगारो पर जैसे ही मोनू गुजरा भक्त प्रह्लाद की लीला जीवंत हो उठी। होली की इस अनूठी परंपरा के हजारों लोग साक्षी बने। मोनू पंडा के दहकती होली से गुजरने के बाद पूरे गांव में इसकी चर्चा होने लगी तो होलिका माता और भक्त प्रह्लाद के जयकारों से पूरा गांव गूंजने लगा।

कोसीकलां क्षेत्र के गांव फालैन में मंगलवार तड़के करीब चार बजे मोनू पंडा ने इस पूरी प्रथा को निभाया। मोनू ने अखंड दीपक की लौ पर होलिका से गुजरने की इजाजत मांगी। होलिका में प्रवेश की लग्न प्रारंभ होते ही श्रद्धालुओं का सैलाब होलिका के आसपास उमड़ पड़ा। मंत्रोच्चारण के साथ पूजा पाठ का दौर शुरू हो गया। सवा घंटे बीतने के बाद दीपक की लौ से मोनू पंडा को शीतलता का आभास हुआ तो उन्होंने प्रह्लाद महाराज का जयकारा लगाया और होलिका में अग्नि प्रवेश कराई गई। कुछ ही देर में धधक उठी होलिका का ताप इतना तेज था कि हर कोई छिपने को मजबूर हो गया।

कुछ ही देर में प्रह्लादजी की माला गले में धारण कर मोनू पंडा ने प्रह्लाद कुंड में स्नान कर होलिका की ओर दौड़ लगा दी। मोनू पंडा 15 फीट ऊंची होलिका पर कुल 19 कदम रखकर सकुशल प्रह्लादजी के मंदिर में जा पहुंचे। पंडा के सकुशल मंदिर में पहुंचते ही सैलाब ने भक्त वत्सल भगवान के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।

जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर फालैन गांव है, जिसे प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। मान्यता है कि गांव के निकट ही साधु तप कर रहे थे। उन्हें सपने में डूगर के पेड़ के नीचे एक मूर्ति दबी होने की बात बताई। इस पर गांव के कौशिक परिवारों ने खोदाई कराई। जिसमें भगवान नृसिंह और भक्त प्रहलाद की प्रतिमाएं निकलीं। प्रसन्न होकर तपस्वी साधु ने आशीर्वाद दिया कि इस परिवार का जो व्यक्ति शुद्ध मन से पूजा करके धधकती होली की आग से गुजरेगा, उसके शरीर में स्वयं प्रहलाद जी विराजमान हो जाएंगे। आग की ऊष्मा का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद यहां प्रहलाद मंदिर बनवाया गया।

मंदिर के पास ही प्रह्लाद कुंड का निर्माण हुआ। तब से आज तक प्रहलाद लीला को साकार करने के लिए फालैन गांव में आसपास के पांच गांवों की होली रखी जाती है। फालैन को प्रहलाद का गांव भी कहा जाता है। गांव का पंडा परिवार प्रहलाद लीला की जीवंत किए हुए हैं।

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