भारतीय संस्कृति में भले ही नारी को कितना भी सम्मान दिया गया हो लेकिन हमेशा से ही समाज कहीं ना कहीं पुरुष प्रधान को तवज्जो देता हुआ आया है। बेटी की जगह बेटे को खास महत्व दिया जाता है और परिवार में बेटे का जन्म होने पर धूमधाम से उत्सव और खुशियां मनाई जाती हैं। आज सरकारें बेटी और नारी समाज को सम्मान दिलाने और आगे बढ़ाने के लिए कई तरह की योजनाओं और अभियान का संचालन कर रही हैं। इसके बावजूद हम पुरुष प्रधान समाज की परंपरा को तोड़ नहीं पा रहे हैं लेकिन आपको बताते चलें कि हमारे देश में एक ऐसी भी जगह है जहां पर बेटे की जगह बेटी को न केवल सम्मान दिया जाता है बल्कि परिवार में बेटी का जन्म होने पर जमकर खुशियां मनाई जाती हैं।
मेघालय में खासी जनजाति के लोग अपने समाज में महिला और बेटी को ऊंचा दर्जा देते हैं। यह जनजाति महिला प्रधान है जहां परिवार की संपत्ति महिला के नाम पर रहती है और वरिष्ठ महिला के गुजर जाने के बाद वह संपत्ति उसकी बेटी या परिवार के अन्य किसी महिला के नाम पर हो जाती है।

खासी जनजाति में बेटी के जन्म पर भारी जश्न मनाया जाता है जबकि बेटे के जन्म पर कोई खास खुशियां नहीं मनाई जाती हैं। यहां के बाजार और व्यवसाय पर अधिकतर महिलाओं का ही अधिकार होता है। हैरानी की बात यह है कि इन समाज से जुड़ी महिला एक से ज्यादा पुरुषों के साथ विवाह कर सकती हैं और पुरुषों को ससुराल में रहना पड़ता है।
मजेदार बात यह है कि खासी जनजाति में महिलाओं को सबसे ज्यादा अधिकार और सम्मान मिला है जबकि पुरुषों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है, यही कारण है कि समय-समय पर खासी जनजाति के पुरुष इस प्रथा में बदलाव की मांग करते रहते हैं। उनका कहना है कि वे महिलाओं को नीचा नहीं दिखाना चाहते लेकिन अपना बराबरी का हक मांग रहे हैं।
