26 सितंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में आईएएस अफसर मोहम्मद इफ्तिखारुउद्दीन तकरीरें करते दिखाई व सुनाई दे रहे थी जिसमें एक अन्य शख्स धर्मांतरण से जुड़ी बातें बता रहा था। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद एसआईटी की जांच में आईएएस अफसर इफ्तिखारुउद्दीन दोषी पाए गए हैं। एसआईटी ने तमाम साक्ष्यों के साथ लगभग 550 पेज की रिपोर्ट शासन को सौंपी है जिसमें साहित्य व वीडियो के आपत्तिजनक कंटेंट को बतौर सबूत शामिल किया गया है।
बताते चलें कि यह वीडियो उस समय की है जब आईएएस अफसर मोहम्मद इफ्तिखारुउद्दीन कानपुर के मंडल आयुक्त थे और मंडलायुक्त आवास पर ही ये तकरीरें की गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद 28 सितंबर को शासन ने सीबीसीआईडी के डीजी जी एल मीणा और एडीजी कानपुर जोन भानु भास्कर के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। लगभग 20 दिन तक चली जांच में यह सब स्पष्ट हुआ।
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने किसी अन्य एजेंसी से भी जांच कराने की सिफारिश की है। आईएएस अफसर इफ्तिखारुउद्दीन के बयानों को एसआईटी ने जांच में शामिल किया है। 2 दिन में उनसे लगभग 16 घंटे तक पूछताछ की गई।
