मानसूनी सीजन में प्राकृतिक आपदा का आना स्वाभाविक है , जिसके चलते लैंडस्लाइड, बादलों का फटना और बाढ़ जैसी कठिन परिस्थितियों का पहाड़ी राज्यों में रहने वाले लोगों को सामना करना पड़ता है। सोमवार को हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में अचानक बादल फटे जिससे कम समय में ज्यादा बारिश भी हुई और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। बता दें हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला, कांगड़ा और कुल्लू प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा से स्थानीय लोगों को खासा नुकसान भी हुआ है। कहीं घर ढह गए हैं तो कहीं लैंडस्लाइड होते देखी जा रही है।देवभूमि हिमाचल में मौसम के कहर ने कुछ लोगों की जानें भी ले लीं।वहीं कई लोग लापता भी हैं। ऐसे में एनडीआरएफ की टीम द्वारा बचाव किया जा रहा है लेकिन बावजूद इसके प्रदेश में तीन लोगों की मौत हो गई है। जबकि एक मुख्याध्यापक और एमबीबीएस की छात्रा सहित 12 लोग लापता हैं। सबसे ज्यादा तबाही कांगड़ा जिला में ही हुई है।
मिली जानकारी के मुताबिक धर्मशाला में करीब 23 साल बाद 24 घंटे के भीतर 395 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। शाहपुर की बोह घाटी में दरिया किनारे छह घर बहने की सूचना है।इतना ही नहीं यहां एक महिला का शव भी मिला है जबकि करीब 10 लोगों के मलबे में दबे होने की जानकारी मिल रही है।
बता दें कुल्लू में तीन दिन के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।इस दौरान कुल्लू के अपर उपायुक्त प्रकाश सिंह ने कहा कि प्रशासन ने अगले 3 दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। कुल्लू जिले में कम से कम 25 सड़कें बंद हो चुकी हैं। वहीं आठ ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली आपूर्ति बाधित है।साथ ही विभागों को इस दौरान हुए नुकसान की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। बहरहाल जिले के अधिकारियों का कहना है कि हालात पर काबू पाने की कोशिश जारी है।वहीं जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग NHW-44 एकतरफा यातायात के लिए खुला है ताकि आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले वाहनों को परेशानी ना हो।
अगर बात करें राजधानी दिल्ली की तो यहां तेज बारिश के चलते एम्स फ्लाईओवर पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है वहीं अन्य क्षेत्रों में भी जलभराव देखा जा रहा है।
कांगड़ा जिले के बोह घाटी में लैंडस्लाइड होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। दरअसल सोमवार को बादल फटने के बाद बाढ़ की वजह से यहां जबरदस्त नुकसान हुआ था।
लेकिन अब मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल क्लाउट बर्स्ट जैसी स्थिति नहीं है। लेकिन पहाड़ी इलाकों में मौसम या आसमान के मिजाज में बदलाव होने में देर नहीं लगती। साथ ही कहा कि निचले इलाकों में रहने वालों को ऐहतियात बरतना चाहिए और झरनों या बरसाती नालों के पास जाने से बचना चाहिए। खासतौर से झरनों या बरसाती नालों के पास नहीं जाना चाहिए।प्रशासन की ओर से यह कहा गया है क्षेत्रीय लोगों से सरकारी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
