किसान आंदोलन के समर्थन में टूल किट के विवाद में फंसी क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि ने शनिवार को सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया उन्होंने उस पोस्ट में दिल में दबी बातों को लिखा और अपने अनुभव को साझा किया। दिशा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि मेरी आजादी का उल्लंघन किया गया टीआरपी चाहने वाले टीवी न्यूज़ चैनलों ने मुजरिम करार दे दिया।
फरवरी माह में पुलिस और न्यायिक हिरासत में दिशा ने जो पल बिताए उन्हें याद करके वह काफी भावुक हो गई और उन्होंने इस पोस्ट में लिखा कि मैंने खुद को यह विश्वास करने पर मजबूर किया कि इस सब से गुजरने का सिर्फ एक ही तरीका है कि मैं सोच लूं कि मेरे साथ ही यह नहीं हो रहा है।उन्होंने कहा कि पुलिस ने 13 फरवरी 2021 को मेरे दरवाजे पर खटखटाया नहीं उन्होंने मुझे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश नहीं किया। आगे भी लिखती है कि तिहाड़ जेल में बिताया समय याद कर दिशा रवि बोली कि 5 दिन खत्म होने पर उन्हें 3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था तिहाड़ में उन्हें हर दिन के हर घंटे के हर मिनट के हर सेकंड का पता था वे अपने सेल में बंद होकर सोचा करती थी कि इस पर्यावरण के बारे में सोचना कब से अपराध हो गया।इसके बाद 23 फरवरी को दिशा रवि को रेगुलर बेल दी गई।
टूलकिट मामले में एक्टिविस्ट शुभम चौधरी ने कोर्ट से अग्रिम जमानत की मांग की है। दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में चौधरी को 12 मार्च तक के लिए अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वह दिल्ली में कोर्ट से राहत ले सकें। इसके अलावा न्यायालय इंजीनियर से नेता बने शांतनु मुलुक और वकील निकिता जैकब की अग्रिम जमानत पर भी सुनवाई करेगा। हालांकि इन दोनों को 15 मार्च तक के लिए गिरफ्तारी से बचने की सुरक्षा प्रदान की गई थी।
दिशा रवि, मुलुक और जैकब पर किसानों के विरोध से संबंधित मामले में साजिश करने और देशद्रोह के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि टूलकिट के जरिए भारत को बदनाम करने की साजिश रची जा रही थी जिसके चलते 26 जनवरी को बड़ी हिंसा हुई।
