आगरा। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकारें तमाम वायदे कर रही है। जनता के बीच पहुँच कर इसे अपनी उपलब्धि बताकर इसका बखान भी किया जा रहा है लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों के भ्रष्टाचार से शहीद के परिजन भी अछूते नहीं रहे है। आगरा में एक ऐसे मामले ने सभी को हिलाकर रख दिया है। मामला सीडीओ विभाग से जुड़ा हुआ है।
बताया जाता है कि जिला विकास अधिकारी ने शहीद कौशल सिंह रावत के परिजनों व विभागीय कर्मचारियों से धोखाधड़ी की। विभाग ने शहीद के परिजनों की आर्थिक मदद के लिए 2.70 लाख रुपये एकत्रित किये थे लेकिन जिला विकास अधिकारी 6 महीने तक उसका निजी उपयोग करते रहे। लेखाकार ने इसकी शिकायत शासन से की और शिकायत सही पाए जाने पर डीडीओ देवेंद्र प्रताप को निलंबित कर दिया गया।
कश्मीर के पुलवामा में कौशल सिंह रावत ने अपनी शहादत दी थी। फरवरी 2019 में वो शहीद हुए थे। शहीद के परिजनों को आर्थिक रूप से मदद देने कब लिए मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों व अधिकारियों ने एक दिन का वेतन दिया था। इसका पैसा एकत्रित भी कर लिया गया और लेखाकार मुकेश भारद्वाज ने इसका डिमांड ड्राफ्ट भी शहीद की पत्नी ममता रावत के नाम से बनवाकर डीडीओ को सौप दिया था लेकिन शहीद के परिजनों को न देकर डीडीओ निजी स्वार्थ में इसे ले लिया।
बताया जाता है कि डीडीओ को जब बैंक ड्राफ्ट सौपा गया तो उन्होंने नगद में पैसा देने की बात कही और 6 महीने तक यह पैसा शहीद को नही दिया गया।
इस पर लेखाकार ने आपत्ति जताई तो डीडीओ ने उक्त कर्मचारी का तबादला कर दिया। कर्मचारी ने प्रमुख सचिव से शिकायत कर दी। शासन ने मामला को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच कराई तो मामला सही निकला और शासन में डीडीओ को निलंबित कर दिया यह जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय से ट्वीट के माध्यम से दी गयी।
शहीद का परिवार इस घटना से दुखी है। उनका कहना है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने कौशल की शहादत को भी नही बख्शा है। वैसे तो उन्हें प्रशासन से कोई सहयोग नही मिला है। सरकारी अधिकारियों ने हमेशा सौतेला व्यवहार किया है। शहीद की पत्नी ममता का कहना है कि 10 माह के बाद भी स्मारक व गेट बनवाये जाने की घोषणा पूरी नही हुई जबकि स्मारक के लिए उन्होंने खुद की जमीन दी थी। प्रशासन ने उसे भी नकार दिया। अपने ही पैसों से वो कौशल की याद में स्मारक बनवा रहे है।
