आगरा। लगभग 3 दिन पहले आगरा की सेंट्रल जेल से एसएन में भर्ती हुए कैदी की हुई जांच में वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया है जिसके बाद जहां जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है तो वहीं सेंट्रल जेल में संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है। कैदी में कोरोना की पुष्टि होने के बाद जेल प्रशासन ने उसके संपर्क में आने वाले सभी कैदियों को क्वॉरेंटाइन कर दिया है और लगभग एक दर्जन कैदियों की सैंपलिंग कराई गई है।
बताया जाता है कि सेंट्रल जेल में निरुद्ध कैदी झांसी का रहने वाला है। तबीयत खराब होने के चलते 3 दिन पहले उसे एसएन में भर्ती कराया गया था, जहां पर उसका कोविड-19 का टेस्ट भी किया गया। 3 दिन बाद आई रिपोर्ट में वह कोरोना पॉजिटिव निकला है। यह जानकारी होने पर जेल की बैरक में हड़कंप मच गया। एहतियातन तौर पर कैदियों को क्वॉरेंटाइन किया गया है तो वहीं जेल प्रशासन इस जांच में जुट गया है कि कैदी जेल में रहने के दौरान संक्रमित हुआ है या फिर एसएन में इलाज के दौरान।
वहीं दूसरी तरफ आगरा में दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। एक महिला सिपाही की मौत होने के बाद उसका शव कार में घंटो तक रखा रहा, किसी ने भी शव को बाहर निकालने की जहमत इसलिए नहीं उठाई क्योंकि कोविड-19 की जांच रिपोर्ट में उसमें कोरोना की पुष्टि हुई है। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी दी जिसके बाद डायल 112 गाड़ी तो मौके पर पहुंच गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम या कोई भी एंबुलेंस नहीं पहुंची जिसके चलते मृतक महिला सिपाही का शव घंटो कार में रखा रहा।
बताया जाता है कि कानपुर में तैनात यह महिला सिपाही आगरा में सिकंदरा के के नगर में अपने ससुराल आई हुई थी। 2 मई को इस महिला की डिलीवरी हुई थी, उसके बाद से ही सर्दी, जुखाम और बुखार की शिकायत बनी हुई थी। तबीयत बिगड़ने पर परिजन इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए लेकिन वहां उसे भर्ती नहीं किया, इसी दौरान रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। परिजन मृतक महिला सिपाही का शव लेकर जैसे ही घर पहुंचे तभी उन्हें जानकारी हुई कि वह कोरोना पॉजिटिव आई है। इसी डर से परिजनों ने महिला के शव को हाथ नहीं लगाया उसका शव घंटों कार में ही रखा रहा। काफी देर बाद आई एक टीम ने शव को सैनिटाइज कर पैक कर दिया लेकिन उसके बाद भी अंतिम संस्कार को ले जाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार होता रहा।
