देश के माननीय राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ( president RamNath Kovind) ने रेल यात्रा करने की इच्छा जताई है, जी हां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दिल्ली से कानपुर और लखनऊ (Kanpur & Lucknow) के लिए रेल यात्रा करना चाहते हैं। राष्ट्रपति द्वारा जाहिर की गई इस मनसा के बाद रेलवे प्रशासन ने करीब 18 साल बाद ( After 18 year) भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
तैयारियों को लेकर बैठकों का सिलसिला जारी
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा की जाने वाली रेल यात्रा में कोई कमी ना रहे , इसके लिए रेलवे प्रशासन के अधिकारी तैयारियों को लेकर लगातार बैठकें ( Meetings) कर रहे हैं। इसी संबंध में एक बड़ी हाई लेवल बैठक मंगलवार ( Tuesday) को आयोजित की गई।
रेलवे कोच को लेकर सूत्रों ने दी जानकारी
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार ,राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यात्रा में रेलवे के आधुनिक महाराजा कोच ( Maharaja Coach) को तैयार किए जाने की संभावना है। बता दें रेलवे मार्ग से साल 2003 में आखिरी बार तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने खास तौर पर तैयार किए गए सैलून कोच में यात्रा की थी। लेकिन लंबे समय तक इस कोच का इस्तेमाल नहीं होने के चलते मौजूदा समय में अब इस कोच का इस्तेमाल करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है। वहीं रेलवे अधिकारियों का कहना है कि महामहिम राष्ट्रपति के आराम और सुरक्षा की दृष्टि के मद्देनजर महाराजा कोच रेलवे प्रशासन ( Indian Railways) की प्राथमिकता है।बहरहाल इस बात को लेकर कोई ऑफिशियल बयान ( Official Statement) जारी नहीं हुआ है।
करीब 18 साल बाद देश के राष्ट्रपति लेंगे रेलवे मार्ग का आनंद
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि तकरीबन 18 साल बाद कोई राष्ट्रपति रेलवे मार्ग से यात्रा करने वाले हैं। वहीं राष्ट्रपति के लिए सफदरगंज या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन रवाना करने को लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है। बता दें राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर समय भी निर्धारित कर लिया गया है। कहा जा रहा है कि यह यात्रा जून महीने के आखिर में हो सकती है, इसलिए रेलवे प्रशासन ने अभी से तैयारियों को लेकर कवायद शुरू कर दी है।
सर्वप्रथम देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद ने की थी रेलवे यात्रा
रेलवे के मुताबिक, सबसे पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने सन 1950 में रेलवे मार्ग से यात्रा की थी। उस समय राष्ट्रपति की रेल मार्ग यात्रा की विशेष तैयारियों को लेकर राष्ट्रपति सैलून नाम से कोच बनाया गया था। इस कोच से सिर्फ तत्कालीन राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि उनके बाद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर नीलम संजीव रेड्डी और फिर डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने बिहार यात्रा की थी।
