आगरा। जब इंद्र के अभिमान से ब्रज पर विपत्ति के घनघोर मेघ उमड़े, तब नन्हे कन्हैया ने अपनी कोमल कानी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रज को छैयाँ दी। गिरिराज की छत्रछाया में गौएँ, ग्वाल-बाल, माताएं और समूचा ब्रज निर्भय हो उठा। समाधि पार्क मंदिर, सूर्य नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिवस मंगलवार को गोवर्धन लीला के भावपूर्ण वर्णन ने श्रद्धालुओं के हृदय में ब्रज रस, प्रकृति प्रेम और गोसेवा का दिव्य भाव भर दिया।
छठवें दिवस के शुभ अवसर पर केशव दत्त गुप्ता, बसंत गुप्ता, डॉ. तरुण शर्मा, प्रमोद सिंघल, मुख्य संरक्षक अजय अग्रवाल (बीएन ग्रुप), संयोजक उमेश बंसल बालाजी एवं मनोज अग्रवाल (पोली भाई) ने विधिवत व्यास पीठ की आरती उतारकर प्रभु चरणों में श्रद्धा अर्पित की। इसके पश्चात मुख्य यजमान संजय–संगीता गुप्ता एवं रोहित जैन द्वारा परंपरागत व्यास पूजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव से सम्पन्न हुआ।
कथा व्यास श्री कीर्ति किशोरी जी (श्रीधाम वृन्दावन) ने भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी, दामोदर लीला, कालिया मर्दन एवं विशेष रूप से गोवर्धन लीला का अत्यंत सरस, भावनात्मक और ब्रज शैली में वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माखन चोरी लीला में श्रीकृष्ण भक्तों के हृदय का माखन चुराते हैं, जबकि दामोदर लीला यह सिखाती है कि भगवान प्रेम की रस्सी से ही बंधते हैं।
कालिया मर्दन लीला के प्रसंग में कथा व्यास ने बताया कि श्रीकृष्ण केवल भक्तों के रक्षक ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जल स्रोतों के संरक्षक भी हैं। यमुना को विषमुक्त करना आज के युग में पर्यावरण संरक्षण का गूढ़ संदेश देता है। गोवर्धन लीला के वर्णन में कथा पंडाल ब्रजधाम बन गया। कथा व्यास ने कहा कि श्रीकृष्ण ने इंद्र पूजा का निषेध कर यह संदेश दिया कि गाय, पर्वत, वन, जल और धरती ही जीवन के आधार हैं। प्रकृति का पूजन ही सच्ची पूजा है। इंद्र का अभिमान टूटता है और गिरिराज महाराज की महिमा ब्रज में स्थापित होती है।
गोवर्धन लीला के उपरांत श्रद्धा एवं भक्ति भाव से श्री गिरिराज जी पूजन, छप्पन भोग अर्पण एवं अन्नकूट महाप्रसादी का आयोजन किया गया। “गिरिराज महाराज की जय” के जयकारों से वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं ने गिरिराज जी की परिक्रमा कर सुख–समृद्धि एवं प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया। छठवें दिवस की कथा के समापन पर महाआरती हुई।
इस अवसर पर कैप्टन राणा, राकेश नारंग, योगेश कंसल, राकेश रेखा अग्रवाल, निखिल वंदना गर्ग, प्रशांत रितु मित्तल, केके अग्रवाल, उपेंद्र शर्मा, विनोद सर्राफ, अमन आरुषि, सागर आयुषी, मुकेश संगीता, माधुरी अतुल चतुर्वेदी, सुनीता कमलनयन फतेहपुरिया, उर्मिल बंसल बालाजी, रोमा बंसल आदि उपस्थित रहे।
