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ठगों के निशाने पर बेरोजगार युवा, नकली जॉब लेटर, नकली वीजा और करोड़ों की ठगी

by pawan sharma

आगरा। देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। हर कोई एक अच्छी नौकरी पाना चाहता है, जिससे अपने साथ साथ परिवार को एक अच्छी जिंदगी दे सके। ऐसे ही युवाओं और नौकरी के लिए भागदौड़ कर रहे लोगों को कुछ ठग अपना निशाना बना रहे हैं। उन्हें विदेशों में अच्छी नौकरी दिलाने के नाम पर उनकी पूरी जमा पूंजी लूट रहे हैं। ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा हरीपर्वत थाना और साइबर पुलिस ने किया है। गिरोह सोशल मीडिया मंचों पर चमकदार विज्ञापन डालकर बेरोजगार युवाओं से संपर्क साधता, फिर वीज़ा प्रक्रिया और दस्तावेज़ सत्यापन के नाम पर मोटी रकम की वसूली करता था। पुलिस ने दबिश देकर इस गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिसमें मुख्य आरोपी अंकित गुप्ता भी शामिल है जो फर्जी रोज़गार केंद्र चलाकर पूरे नेटवर्क का संचालन करता था।

पकड़े गए सात लोग, सरगना भी शामिल
गैंग में पकडे़ गए लोगों में अंकित गुप्ता गैंग का मास्टर माइंड है। वो पहले भी इस मामले में पकड़ा जा चुका है। दिल्ली में उसके खिलाफ केस दर्ज है। अंकित ने बताया कि गैंग के नवनीत जैन व हेमन्त शर्मा फर्जी ऑफर लेटर, वीजा बनाते थे। विजय कुमार, राजेश शर्मा व विशाल मेहता कॉलिंग करते थे।

नकली इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (ई-वीज़ा), कॉल लेटर, नियुक्ति-पत्र भी बरामद
डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि इस छापेमारी के दौरान मौके से नकली इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा (ई-वीज़ा), सरकारी दस्तावेज़, बुलावा-पत्र (कॉल लेटर), नियुक्ति-पत्र, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तरह बनाए गए लेटर हेड, मुहरें और कई मोबाइल-सिम मिले हैं। इन्ही के माध्यम से बेरोजगारों को नकली जॉब लेटर बनाकर दिया जाता था।

ठगी का तरीकाः
चमकदार विज्ञापन – सोशल मीडिया पर विदेश में उच्च वेतन पर जॉब, तुरंत जॉइनिंग, वीज़ा सुनिश्चित जैसे प्रलोभन भरे विज्ञापन।
पहला संपर्क – इच्छुक अभ्यर्थियों से चैट/फ़ोन पर बात कर दस्तावेज़ जांच और प्रोफ़ाइल शॉर्टलिस्टिंग के नाम पर प्रारम्भिक राशि।
फर्जी काग़ज़ात की सप्लाई – बनावटी बुलावा पत्र और नियुक्ति पत्र भेजकर भरोसा जगाना; दूतावास जैसे दिखाई देने वाले नकली ई-वीज़ा जारी करना।
अंतिम वसूली – टिकट, बीमा, चिकित्सा जांच, सत्यापन शुल्क आदि के नाम पर मोटी रकम ऐंठना।
ठिकाने की आड़ – फर्जी/काल्पनिक पहचान पर किरायानामा कर ऑफिस चलाना, बार-बार ठिकाना बदलना ताकि पहचान न हो सके

डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि फर्जी जॉब सेंटर आगरा के ही संजय प्लेस के सत्यम कॉम्प्लेक्स में चल रहा था। शातिर ठगों ने एसआई ओवरसीज के नाम से कंपनी बनाई हुई थी। ये सोशल मीडिया के जरिए विदेश में नौकरी दिलवाने के लिए प्रचार करते थे। विदेश में नौकरी की चाहत रखने वाले लोग इनके नंबर पर कॉल करते थे। यह ठग युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए कंपनियों के फर्जी नाम होली इंटरनेशनल, जयां इंटरनेशनल, प्राउड इंटरनेशनल, सी ओवरसीज, मोन ओवरसीज, ओमेक्स इंटरनेशनल के नाम बताते थे। अपने ऑफिस का एड्रेस भी देते थे। आफिस में फीमेल स्टाफ भी रखा हुआ था। जब कोई वहां पहुंचता था तो उसे इन लोगों को लेकर विश्वास हो जाता था।

डीसीपी सिटी सोनम कुमार को इस गिरोह के बारे में शिकायत मिली थी। उन्हीं के आदेश पर एडीसीपी आदित्य कुमार और एसीपी हरीपर्वत के नेतृत्व में विशेष टीम गठित हुई। तकनीकी निगरानी और मानवीय ख़ुफ़िया के आधार पर की गई छापेमारी में गिरोह के लोग रंगे हाथ पकड़े गए।

प्रारम्भिक पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का जाल कई राज्यों तक फैला हो सकता है। पुलिस अब तक ठगे गए लोगों की पहचान कर रही है और लेन-देन के डिजिटल साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं। बरामद उपकरणों की फ़ॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, ताकि पीड़ितों की सूची और लेन-देन का विवरण पुख्ता हो सके।

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