आगरा। पूरी दुनिया के लोगों को अपनी खूबसूरती के लिए मोहताज करने वाला ताज धीरे धीरे बदसूरत होता जा रहा है। जी हां चिंता का विषय यह भी है किस सात समुंदर पार से ताज देखने आ रहे पर्यटक ताज की नक्काशी और पच्चेकारी को लेकर मायूस है । जहां पूरी दुनिया में ताज अपनी खूबसूरती का डंका बजाता है । सफेद संगमरमरी हुस्न ताज अब धीरे-धीरे गंदा होता जा रहा है। सफेद संगमरमरी हुस्न ताज के बदन पर काले धब्बे दिख रहे है। और ताज के संरक्षण के काम करने वाले विभागों के अधिकारियों के लिए भी ये चिंता का विषय है। हमारे पास कुछ ऐसे वीडियो सामने आए हैं । जहां ताज की मुख्य गुम्बद और आसपास में लगी पच्चेकारी और नक्काशी धीरे धीरे झड़ रही है। जो वीडियो सामने आए है जिसे देखकर कह सकते है कि ताज के बदन से धीरे-धीरे झड़ रही नक्काशी और पच्चेकारी पर कोई काम नहीं किया गया है। मगर इतना जरूर है कि जिस जगह से यह नक्काशी और पच्चेकारी झड़ गई है। महज खाना पूर्ति के लिए उस जगह को रंग से भर दिया गया है। भले ही विभागों ने ताज के बदन से गायब हो रही नक्काशी और पच्चेकारी की जगह को रंग से भर दिया हो । मगर वो इतनी खूबसूरत नहीं है । जो पच्चेकारी और नक्काशी से आती है। ताजमहल निहारने वाले पर्यटक इसको लेकर काफी चिंतित हैं। और मायूसी के साथ अपनी पीड़ा भी बता रहे हैं।
ताजमहल के संरक्षण के लिए विभागों के पास केंद्र सरकार की ओर से लाखों करोड़ों रुपयों का बजट भी आता है । मगर जो वीडियो सामने आए हैं । जिसमें ताज के हुस्न से नक्काशी और पच्चेकारी गायब है। इन वीडियो को देखकर आप कह सकते हैं कि ताज के संरक्षण को लेकर फिलहाल बहुत बड़ा कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। और ना ही ताज के संरक्षण को लेकर विभाग गंभीर है। जानकार कहते हैं कि अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब पूरी दुनिया में अपनी खूबसूरती का डंका बजाने वाला ताज खूबसूरती को छोड़ बदसूरती में तब्दील हो जाएगा। इसके लिए ताज संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग की जिम्मेदार होंगे।
संगमरमरी हुस्न और पूरी दुनिया में अपनी खूबसूरती का डंका बजाने वाला ताज को कहीं किसी की नजर तो नहीं लग गई । आखिरकार ताज की मुख्य गुम्बदों और मीनारों से गायब हो रही नक्काशी और पच्चेकारी से धीरे-धीरे ताज के बदन पर बदसूरती छाने लगी है । जो वास्तव में एक चिंता का विषय है। ताजनगरी में अगर ताज ने अपनी खूबसूरती खोई तो पूरी दुनिया में ताजनगरी भी अपनी पहचान खो देगी।
