उत्तर प्रदेश की एसटीएफ ने कानपुर के किदवई नगर से तीन लोगों को रेमडेसीविर इंजेक्शन के साथ गिरफ्तार किया है।ये लोग कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसीविर इंजेक्शन की तस्करी किया करते थे। जब पुलिस को मुखबिर द्वारा सूचना मिली तो पुलिस ने दबिश देकर इन तीनों आरोपियों को धर दबोचा। एसटीएफ को इन आरोपियों के कब्जे से ढाई सौ से ज्यादा रेमडेसीविर इंजेक्शन बरामद हुए हैं। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक तीन तस्करों में से दो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का काम करते हैं। ये आरोपी इस इंजेक्शन की कीमत ज्यादा से ज्यादा वसूल कर मुनाफा कमाने की फिराक में थे।
दरअसल जहां देश में कोरोना के आंकड़ों की रफ्तार बेकाबू होने लगी है वहीं इस इंजेक्शन की मांग बढ़ने के साथ-साथ तस्करी के भी किस्से सामने आने लगे हैं। जबकि बाजार में इस इंजेक्शन की किल्लत होने लगी है।कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद रेमडेसीविर की कालाबाजारी बढ़ने के कई मामले सामने आए हैं। इसके बाद राज्य सरकारों ने रेमडेसीविर इंजेक्शन को बेचने के लिए कुछ गाइडलाइन तय कर दी हैं। केंद्र सरकार ने ड्रग इंस्पेक्टर और बाकी अधिकारियों को रेमडेसीविर की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं।
कानपुर के मिलिट्री इंटेलीजेंस यूनिट की एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बाबू पुरवा इलाके में रेमडेसीविर इंजेक्शन के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया। डीसीपी (दक्षिण) रवीना त्यागी ने कहा, “रेमडेसीविर इंजेक्शन की 265 शीशियों को जब्त कर लिया गया है और इसकी वास्तविकता की जांच की जा रही है।”
बताया गया कि कुछ दिन पूर्व यूपी एसटीएफ को सूचना मिली थी कि रेमडेसीविर इंजेक्शन की कमी पड़ने के बाद तस्कर एक्टिव हो गए हैं इसलिए पुलिस ने मिले इनपुट के आधार पर कानपुर के किदवई नगर पहुंचकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। तस्करों के पास से 265 इंजेक्शन बरामद हुए हैं।पकड़े गए तस्करों के नाम मोहन सोनी, प्रशांत शुक्ला और सचिन कुमार है। देश में इस वक्त रेमडेसीविर के इंजेक्शन की कीमत 4 हजार रुपए के आसपास है, लेकिन आरोपी इन्हें ऊंचे दामों पर बेचते थे।
